बगैर नोटिए दिए छापामाकर वसूले हजारो रुपये
छोटे व्यापरियों का उत्पीड़न कर वाही- वाही लूट रहे हैं निगम अफसर

गाजियाबाद। हिमांशु मित्तल भाजपा नेता एवं पूर्व पार्षद ने कहा कि निगम की टीम द्वारा गाजियाबाद में कुछ छोटे रेस्टोरेंट आदि पर छापा मार कर उनसे जुमार्ना वसूल किया गया उनका कसूर यह था कि वह अपने तंदूर में लकड़ी का कोयला जला रहे थे। तंदूर में लकड़ी का कोयला जलाना पर्यावरण की दृष्टि से ठीक नहीं है लेकिन क्या इन छोटे-छोटे रोज कमाने खाने वाले व्यक्तियों पर छापा मारकर और उनसे 20-20 25-25 हजार रुपए का जुमार्ना वसूलकर नगर निगम क्या संदेश देना चाहता है। यह मेरी समझ परे हैं ऐसा प्रतीत होता है कि सॉफ्ट टारगेट होने के कारण नगर निगम इनको अपना निशाना बनाता है और मजे की बात यह है कि नगर निगम द्वारा उनका लकड़ी का कोयला भी जप्त कर लिया गया। अगर कानून की दृष्टि से देखा जाए तो आपको चालान करने का तो अधिकार है लेकिन किसी का कोयला जप्त करने का अधिकार नहीं है दूसरा विषय यह है कि क्या इस कार्रवाई को करने से पहले आपने कोई अखबार या जनहित में कोई सूचना प्रकाशित की या आपने इन लोगों को कोई नोटिस दिए कि आप इतनी दिनो तक कोयला ना जलाएं अन्यथा हम आपके ऊपर कार्रवाई करेंगे। आनन फानन में इन छोटे लोगों पर कार्रवाई करके नगर निगम अपने कार्य की सिद्धि मान लेता है। एक भी बड़ा होटल प्रतिष्ठान पर नगर निगम इस तरह की कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं करता यह न्यायहित या जनहित में एक गलत संदेश देता है और छोटे व्यापारियों मेंं सरकार के प्रति आक्रोश भी उत्पन्न करता है क्या नगर निगम के पास कितने टोटल रेस्टोरेंट है उनकी सूची है अगर है तो क्या उनके द्वारा उन सभी को नोटिस जारी किए गए लेकिन ऐसा नहीं है क्या नगर निगम ने उन पर चालान करने से उनके मापदंडों को नापा कि वह हवा में प्रदूषण फैला भी रहे हैं या ना फैला रहे हैं क्या पता उन्होंने प्रदूषण न फैलाने के लिए उचित व्यवस्थाएं कर रखी हैं लेकिन नगर निगम के पास इसको नापने का भी कोई मापदंड नहीं है बस सीधा सा एक फैसला है गरीब लोगों पर अत्याचार करो उनसे जुमार्ना वसूल शुरू करो और सरकार में अपनी वाही- वाही लूटो कि हमने इस कार्य को कर कर इतना जुमार्ना वसूल कर लिया है अगर यह कार्य करना है तो यह एक निरंतर प्रक्रिया है आप लगातार इस कार्य को करते रहे लोग अपने आप जलाना बंद कर देंगे लेकिन नहीं आप अचानक घर से निकलते हैं जुमार्ना वसूलते हैं और फिर साल 6 महीने के लिए सो जाते हैं। इन सभी पहलुओं पर मेरे द्वारा विचार किया जा रहा है और यदि उचित हुआ तो शीघ्र ही मेरे द्वारा जनहित और न्यायिक में सक्षम न्यायालय में वाद भी दायर किया जाएगा।