12वीं के बाद अगर लॉ करियर बनाना है तो उसके लिए सीयूईटी एग्जाम देना होता है या फिर क्लैट एंट्रेंस एग्जाम को क्रैक करना होता है? लॉ डिग्री यानी 5 वर्षीय एलएलबी के लिए कॉलेज में एडमिशन चाहिए तो कौन सा एंट्रेंस एग्जाम देना होगा? दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में एडमिशन चाहिए तो 5 वर्षीय एलएलबी के लिए सीयूईटी या क्लैट देना पड़ेगा?

क्या है सीयूईटी ?
सीयूईटी की फुल फॉर्म कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (Common University Entrance Test) है. कॉलेज में दाखिला के लिए ये संयुक्त प्रवेश परीक्षा है. केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों में यूजी और पीजी में प्रवेश के लिए इसमें उम्मीदवार का सफल होना जरूरी है.
क्लैट क्या है?
क्लैट की फुल फॉर्म कॉम लॉ एडमिशन टेस्ट है. ये एक राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रमुख प्रवेश परीक्षा है. भारत में इस परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को देश के टॉप नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (NLUs) में लॉ की पढ़ाई करने का अवसर मिलता है. इस एग्जाम में पास होने वाले उम्मीदवार वकालत के 5 साल इंटीग्रेटेड (UG) या पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) कोर्स में एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं.
क्लैट और सीयूईटी में किसे चुनना सही?
वरिष्ठ करियर काउंसलर एवं क्लैट एक्सपर्ट राहुल गोयल का कहना है कि सीधे शब्दों में कहें तो ये आपके लक्ष्य पर निर्भर करता है. अगर टॉप लॉयर बनने का विचार है तो क्लैट को अपनाना जरूरी है. जबकि, अन्य करियर ऑप्शन या कोर्स की तलाश में भी हैं तो सीयूईटी भी दें. क्लैट देने वाले उम्मीदवारों को राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs) में दाखिला मिल सकता है. ऐसे में ज्यादा चांस प्लेसमेंट को लेकर बढ़ जाते हैं. हालांकि, सीयूईटी वाले उम्मीदवार को राज्य और सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल सकता है. वकील बनने की प्लानिंग है तो सबसे समझदारी ये रहेगी कि आप सीयूईटी और क्लैट दोनों परीक्षा दें. इतना ही नहीं, एक एग्जाम और है जिसे देकर टॉप यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल सकता है. दरअसल, आइलेट (AILET) के जरिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली में एडमिशन मिल सकता है जो भारत के सबसे प्रतिष्ठित लॉ कॉलेजों में से एक है. अगर ज्यादा एग्जाम देना नहीं चाहते हैं तो अपनी तैयारी में सबसे पहले क्लैट को प्राथमिकता दें.