गाजियाबाद। एसएमवी समूह द्वारा विकसित शौर्य पुरम आवासीय परियोजना अब विजिलेंस जांच के दायरे में आ गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विजिलेंस विभाग के पुलिस उपाधीक्षक ने इस संबंध में जिलाधिकारी गाजियाबाद को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परियोजना में सड़क, अस्पताल, विद्यालय तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित लगभग 200 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि को कथित रूप से बेच दिया गया। आरोपों के सामने आने के बाद परियोजना की स्वीकृति प्रक्रिया और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और आवंटियों का कहना है कि जिस भूमि उपयोग के आधार पर परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) स्वीकृत की गई थी, उसकी निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी थी। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि यदि आरक्षित भूमि के उपयोग में परिवर्तन हुआ तो नियोजन एवं प्रवर्तन तंत्र ने समय रहते संज्ञान क्यों नहीं लिया।
बताया जा रहा है कि शौर्य पुरम परियोजना के अनेक आवंटी पिछले कई वर्षों से विभिन्न मंचों पर शिकायतें दर्ज कराते रहे हैं। उनका आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
इसी क्रम में कुछ शिकायतकर्ताओं ने वेव सिटी परियोजना का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि वहां ग्रीन बेल्ट के लिए प्रस्तावित भूमि के उपयोग को लेकर भी अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।
विजिलेंस विभाग द्वारा जिलाधिकारी को पत्र भेजे जाने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक स्तर पर जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की सत्यता के संबंध में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।